ब्लागर मित्रों को मेरा नमस्कार। मेरा नाम तो आप जान ही रहे हैं- ललित पांडे। यह भी बता चुका हूं कि लिखास रोग से पीड़ित हूं। ना..ना.. रोग का मतलब किसी बीमारी से कतई नहीं है। मुझे कोई बीमारी नहीं है। लिखास रोग तो मुझे जिंदगी देता
है। मेरे दिमाग को साफ रखता है। हां, केवल यह बताना बाकी है कि अपने रोग को बढ़ाने के लिए इन दिनों में पर्ल ग्रुप की साप्ताहिक पत्रिका “शुक्रवार” में बैठा हूं।
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